साँप Posted on अप्रैल 21, 2010 by Rewa Smriti साँप ! तुम सभ्य तो हुए नहीं नगर में बसना भी तुम्हें नहीं आया। एक बात पूछूँ–(उत्तर दोगे?) तब कैसे सीखा डँसना– विष कहाँ पाया? Poet – अज्ञेय